मुरादाबाद: दीपावली का त्यौहार नजदीक है लेकिन कुम्हारों को अपने रोजगार को लेकर चिंता सताने लगी है। जिसकी वजह है इलेक्ट्रॉनिक झालरें। इलेक्ट्रॉनिक आइटमों ने अब मिट्टी के दीपकों की रोशनी को कम कर दिया है। मिट्टी के दीपको की जगह अब इलेक्ट्रॉनिक झालरों ने ले ली है। पहले के मुकाबले अब मिट्टी के दीपकों की खरीदारी लोग काफी कम कर रहे हैं। औपचारिकता के लिए ही लोग मिट्टी के दीपक खरीद कर पूजन करते हैं और अपने घरों को मिट्टी के दीपकों की रोशनी से जगमग करने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक झालरों से अपने घरों को जगमगा रहे हैं। ऐसे में कुम्हारों के रोजगार पर खासा असर पड़ा है।
कुम्हार महिला दुकानदार कमला ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तो लोग 11 या 21 इतनी ही संख्या में दीपक दीपावली के पर्व पर पूजन के लिए ही खरीदते हैं, बाकी तो वह अपने घरों को इलेक्ट्रॉनिक झालरों से सजाते हैं। उन्होंने कहा कि पहले भारी मात्रा में दीपावली के पर्व पर मिट्टी के दीपकों की बिक्री होती थी,मगर जब से इलेक्ट्रॉनिक झालरें बाजारों में आई हैं तब से मिट्टी के दीपकों की डिमांड कम हो गई है। वहीं दुकानदार रोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले लोग भारी संख्या में मिट्टी के दीपक दीपावली के पर्व पर खरीद कर अपने घरों को मिट्टी के दीपक से रोशन करते थे, मगर अब इलेक्ट्रॉनिक झालरों ने मिट्टी के दीपकों की जगह ले ली है। अब लोग सिर्फ पूजन के लिए ही मिट्टी के दीपक खरीदतें हैं, ऐसे में उनके रोजगार पर खासा असर इलेक्ट्रॉनिक झालरों ने डाला है।
