Ram Mandir: श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव ने की प्रेसवार्ता, कहीं ये बड़ी बातें

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सोमवार को पत्रकार वार्ता कर समारोह की तैयारियों और कार्यक्रम को लेकर जानकारी दी। प्रेसवार्ता में उन्होंने आम लोगों के दर्शन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है।अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर तैयारियां पूरी है। 


आज से पूजा विधि प्रारंभ हो गई है जो 21 जनवरी तक चलेगी। इससे पहले श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बीते दिन पत्रकार वार्ता कर समारोह की तैयारियों और कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर बताया। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया  कि प्राण प्रतिष्ठा के समय गर्भगृह में पीएम नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत, श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास और सीएम योगी आदित्यनाथ गर्भगृह में मौजूद रहेंगे। चंपत राय ने बताया कि 20 जनवरी से 21 जनवरी तक रामलला के दर्शन बंद रहेंगे। फिलहाल अभी इस पर विचार चल रहा है। मंदिर के आचार्य और पुजारी ही अंदर मौजूद रहेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियों को लेकर कोई असुविधा न हो। प्रधानमंत्री के निवेदन को दोहराते हुए चंपत राय बोले कि 22 जनवरी को समाज के लोग अपने-अपने मंदिरों की सफाई करें। मंदिर छोटा हो या बड़ा दोनों ही भगवान के घर हैं, इसलिय सभी में पूजन-भजन हो। टेलीविजन या एलईडी स्क्रीन लगाकर खुद और अपने-अपने आसपास के लोगों को प्राण प्रतिष्ठा समारोह को दिखाएं।

प्रेसवार्ता की मुख्य बातें

1.चंपत राय ने आगे बोलते हुए समाज के लोगों से अपील की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद लोग शंख बजाएं, शंख की ध्वनि शुभ ध्वनि है। साथ ही प्रसाद वितरण करें, प्रसाद क्या बंटा, इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि अधिक से अधिक लोगों तक प्रसाद पहुंचे। हमारे आयोजन मंदिर केंद्रित होने चाहिए। सूर्य अस्त होने के बाद अपने घरों के मुख्य द्वार पर पांच दीये जलाएं।

2.चंपत राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मनोभाव प्रकट करेंगे। इस कार्य में संभवतः 65 से 75 मिनट का समय लगेगा। मानसरोवर, अमरनाथ, गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज का संगम तट, नर्मदा, गोदावरी, नासिक, गोकर्ण (कर्नाटक) अनेक स्थानों का जल आया है। इसके अलावा तमाम लोग अपने-अपने स्थानों का जल और रज (मिट्टी) यहां ला रहे हैं।

3.चंपत राय ने कहा कि दक्षिणी नेपाल से एक हजार टोकरियों में भेंट आई है, जिसमें अनाज, फल, मेवे, वस्त्र और सोना-चांदी आदि आया हुआ है। माता जानकी का जन्म स्थान है वहां से लोग आए हैं, भगवान श्रीराम की ननिहाल छत्तीसगढ़ है, वहां से भी भेंट आई हुई है। एक साधू बैलगाड़ी में घी लेकर जोधपुर से आए। ऐसे तमाम लोग श्रद्धापूर्वक रामलला को भेंट करने के लिए अनेक वस्तुएं लेकर आ रहे हैं और यह सिलसिला जारी है।

4.चंपत राय ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भारतीय परंपरा के सभी तरह के वाद्ययंत्र जैसे- उत्तर प्रदेश का पखावज व बांसुरी व ढोलक, कर्नाटक का वीणा, महाराष्ट्र का सुंदरी, पंजाब का अलगोजा, ओडिशा का मर्दल, मध्य प्रदेश का संतूर, मणिपुर का पुंग, असम का नगाड़ा और काली, छत्तीसगढ़ का तंबूरा, बिहार पखावज, दिल्ली की शहनाई, राजस्थान का रावण हत्ता, बंगाल का श्रीखोल, आंध्र का घटम, झारखंड का सितार, गुजरात का संतार, तमिलानाडु का नादस्वरम और मृदंग, उत्तराखंड का हुड़का का वादन होगा। बस मंत्रोच्चार और विशिष्ट जनों के मनोभाव प्रकट करने के दौरान इन वाद्ययंत्रों का वादन नहीं होगा।

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